विज्ञापन

प्रेम में डूबी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्यार को साँसों से काबू नही कर सकी।
        
                                                    
                            
आँखों ने जाहिर किया लगे थकी थकी।।

उसकी कहानी के हर एक पन्ने पर लिखी।
सामने आते ही उसकी नज़रे झुकी झुकी।।

जो कर लेते प्रेम फिर तन्हा रह नही पाते।
किस्मत की धनी उम्र से पूरी पकी पकी।।

उसके और मेरे बीच के रास्ते कुछ तंग रहे।
मगर वक्त बदला वो रह गई हक्की बक्की।।

अब तो बातचीत हो जाती 'उपदेश' अक्सर।
हिम्मत उसकी रंग लाई रही लक्की लक्की।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all