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बिस्तर पर तरह-तरह की कसरत रहेगी।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे बाद किसके लिए महारत रहेगी।
        
                                                    
                            
बस हम कदम के लिए हसरत रहेगी।।

हमें भी बितानी हैं शामें फुर्सत साथ।
बिस्तर पर तरह-तरह की कसरत रहेगी।।

कन्धे पर सिर रख कर सोने की इच्छा।
सीने पर हथेली रखने की जुर्रत रहेगी।।

बातों का सिलसिला पहले कम चला।
बेबाकी से सुनाने की फितरत रहेगी।।

तकिया और चादर भी खामोश न होगे।
प्रेम को नींद कहाँ 'उपदेश' लत रहेगी।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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