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नौकरी मुबारक

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर में रहकर सुकून की आदत हुई।
        
                                                    
                            
नौकरी मुबारक उनकी नही बात हुई।।

आजादी के जश्न में क्या खो दिया।
मोहब्बत बाहर अन्दर न इवादत हुई।।

शिक्षित महिला ने सद्भाव बना लिये।
उसकी घर परिवार में ही ताकत हुई।।

पुरुष भी कम नही काफ़िर हो गया।
बदकिस्मती से प्यार की शहादत हुई।।

तालमेल को बिठाने के लिए 'उपदेश'।
मौका ढूँढ़ते निकालते आधी रात हुई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
2 महीने पहले
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