शिक्षक बनकर ज्ञान को स्कूल में बाँटा।
झूठी उम्मीदों की डोर को हाथो से काटा।।
लोग पूछते है हमसे मोहब्बत के उसूल।
सद्भाव सीखने से करते नफरत को टाटा।।
दिल साफ हो जिनका वो हार क्यों जाते।
उन्होने हर मोड़ पर समझौते में वक्त काटा।।
ज्यादा दिन वही निभाता जिसने समझकर।
मन भेद के साथ-साथ मत भेद को पाटा।।
चालाकी के तमाशे में फंसे लोग 'उपदेश'।
कुछ पाते और फिर अन्त में उठाते घाटा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'