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तेरी उँगलियों का मेरी धड़कनों से नाता।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चुम्बन वासना से पहले विश्वास होते।
        
                                                    
                            
प्रेम में होंठों से नही माथे से शुरू होते।।

बर्षों की चिंताएँ शायद धड़कना चाहे।
मेरे होंठ तुम्हारे माथे पर ही ठहरे होते।।

तुम्हारे पलकों की कोमलता कुछ कहे।
जैसे सोई झील बिना जगाए छुए होते।।

तुम्हारे गाल पर चुम्बन दूरी मिटाए जैसे।
महीनों की प्रतीक्षा पल-पल हलके होते।।

तेरी उँगलियों का मेरी धड़कनों से नाता।
मौन स्वीकृति मिलते 'उपदेश' जले होते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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