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कोई चाहत नहीं

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यकीन कैसे मानूँ
        
                                                    
                            
कि तुम्हें कोई चाहत नही।
बस बातों की तलबगार
उससे ज्यादा चाहत नही।

जो चाहा प्रेम के खातिर
उससे कम की चाहत नही।
खुद से ज्यादा और क्या
अधिकार की चाहत नही।

हाल-ए-दिल मेरा जानते
दुआ काफी और चाहत नही।
दवाई एक ही है 'उपदेश'
मोहब्बत के अलावा चाहत नही।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
2 महीने पहले
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