विज्ञापन

किसी का प्रेम

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिस किसी का प्रेम धीरे-धीरे प्रतिशोध बनता।
        
                                                    
                            
विरह से निकलकर शिकायत का रूप बनता।।

प्रेम में हम अक्सर जब चिन्ह खोजने लगते।
एक संदेश एक कॉल एक हाँ इंतजार बनता।।

प्यार में किसी की परवाह करना अजूबा नही।
परवाह धीरे-धीरे खुद खूबसूरती खोने लगता।।

साथ तो रहते मगर पहचान को मोहताज हम।
प्रेम के नाम पर कोई और जगह लेने लगता।।

सच्चा प्यार किसी के अस्तित्व को बाँधता नही।
सम्मान के साथ 'उपदेश' के साथ चलने लगता।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

श्री सनातन

671 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7459 कविताएं

View Profile