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कई बाते

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम बोलना चाहते मगर बोल नही पाते।
        
                                                    
                            
जब रोना चाहते तब चेहरे से मुस्कुराते।।

फिर एक दिन दर्द अंदर पहाड़ बन जाता।
कई बाते मन में दब जाती बता नही पाते।।

अगर सोचना कम बोलना ज्यादा हो जाए।
तो भी हम अपने को माफ कर नही पाते।।

रिश्ता धीरे-धीरे कुमलाने लगता 'उपदेश'।
कुछ बाते सोच में रहती निकाल नही पाते।।

गर दोनों एक दूसरे को समझने लग जाए।
तो रिश्ते मजबूत होकर बिखरने नही पाते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
3 महीने पहले
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