विज्ञापन

मिटाना चाहो गर तो भटकना छोड़ देना

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिछड़ने के बाद भी जहन में रहूँगा कहीं।
        
                                                    
                            
हवाओ में मौसम में 'उपदेश' रहूँगा कहीं।।

बारिश में सुनोगे मधुर संगीत अगर तुम।
जमीन से आसमान बादल में रहूँगा कहीं।।

मिटाना चाहो गर तो भटकना छोड़ देना।
कोने में ध्यान लगाना साँसों में रहूँगा कहीं।।

प्यार तो राह होगी भगवान को पा लेने की।
इस जन्म में नही तो अगले में रहूँगा कहीं।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all