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पूरा का पूरा जिस्म पखार गई।।

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोशिश करके मैं हार गई।
        
                                                    
                            
फिर हिचकी आई मार गई।।

कब से लगी थी समझाने में।
उस वज़ह से आँखें चार हुई।।

खता न होती यदि तुम से।
यों आई बहार बेकार गई।।

इश्क का मौसम तंग हुआ।
खिदमत तुम्हारी मार गई।।

किसने दरीचे खोले 'उपदेश'।
पूरा का पूरा जिस्म पखार गई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
एक महीने पहले
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