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आहिस्ता-आहिस्ता

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आहिस्ता-आहिस्ता गुरूर को बड़ा करती जा रहीं थीं मैं।
        
                                                    
                            
कि एक दिन गले लगाकर 'उपदेश' ने धराशायी की मैं।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
3 महीने पहले
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