कौन कहे तू अविनाशी है?
कौन कहे तू अविकारी?
कौन कहे कभी ना रुकता?
कौन कहे तू द्रुतगामी?
अचल रूप तूने दिखलाया,
मैंने तेरा सत्य है पाया।
एक समान गति न तेरी,
तूने कितनों की राहें घेरी।
कभी कभी तू वेगवान है,
कभी कभी तू चिरकाली।
कभी लगे तू हृदयवान है,
कभी लगे निष्ठुर भारी।
वास्तव में तू विषमगति का,
एक न तेरी काया है।
रूप तेरा है बहुरूपी,
स्वभाव ही तेरा माया है।