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बहुरूपी समय

Upasna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कौन कहे तू अविनाशी है?
        
                                                    
                            
कौन कहे तू अविकारी?
कौन कहे कभी ना रुकता?
कौन कहे तू द्रुतगामी?

अचल रूप तूने दिखलाया,
मैंने तेरा सत्य है पाया।
एक समान गति न तेरी,
तूने कितनों की राहें घेरी।

कभी कभी तू वेगवान है,
कभी कभी तू चिरकाली।
कभी लगे तू हृदयवान है,
कभी लगे निष्ठुर भारी।

वास्तव में तू विषमगति का,
एक न तेरी काया है।
रूप तेरा है बहुरूपी,
स्वभाव ही तेरा माया है।
4 दिन पहले
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