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बढ़ते रहें कदम

Udayvir Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदम कदम यदि थकें कदम, फ़िर भी बढ़ते रहें कदम।
        
                                                    
                            
थोड़े कदम कभी अधिक क़दम, राह चलते रहें कदम।।
शूल मिलें यदि कदम कदम,तो भी न रुकें चलते कदम।
ज़ख्मों से बहते लहू दर्द को, पीकर भी बढ़ते रहें कदम।
न थमते क़दम वक्त के,वक्त कदम से मिलते रहें कदम।
है जीवन की सच्ची रीत यही,हरदम गतिमान रहें क़दम।
1 सप्ताह पहले
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