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बात कह दो ना वो

Trishika Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बात कह दो ना वो, बात ही बात में
        
                                                    
                            
प्रेम प्रस्ताव दे दो न सौगात में

मैंने देखा नहीं मुद्दतों से तुम्हें
दीद दे दो मुझे ईद की रात में

हर घड़ी मेरे पहलू में बैठे रहो
प्यास बुझती नहीं इक मुलाक़ात में

गीत ग़ज़ले नहीं, मैं तो तुमको लिखूँ
तुम ही तुम हो मेरे सब ख़यालात में

मेघ के हिज्र में तप रही है 'धरा'
वस्ल पाएगी सावन की बरसात में
— त्रिशिका धरा
2 महीने पहले
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