विज्ञापन

वो जो रहबर है....

देवर्षी मनीष येंडे

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो जो रहबर है, बड़ी हस्ती है,
        
                                                    
                            
हम मुफलिसो की जान सस्ती है

जहां से गुज़रता है निकासी नाला,
वही एक गरीबों की बस्ती है

अंधेरे में डूबी है कितनी गलियां,
ये ज़मीं रोशनी को तरसती है

सरहदों पर बढ़ा दी है पहरेदारियां,
खुदमुख्तारी परिंदों की हस्ती है
- देवर्षी मनीष येंडे
 
6 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13122 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7396 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10908 कविताएं

View Profile