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वो कितना मजबूर है

Suryansh Reetma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो कितना मजबूर है,
        
                                                    
                            
अब तो घर से भी बहुत दूर है।
काम की तलाश में शहर आया था,
पर यहाँ भी पहले से मजदूर हैं।
बापू कर्ज़ में डूबे हैं,
पैसा घर भेजना भी ज़रूर है।
लौट भी जाऊँ तो घर कैसे जाऊँ,
हालात का ही तो कसूर है।
— सूर्यांश रीतमा
4 दिन पहले
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