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एक अक्षर का अंतर

Suresh Mulchandani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक अक्षर का अंतर
        
                                                    
                            
एक वर्ण का भेद है, जग में रीत अनोखी न्यारी,
धर्म समझकर जो अपनाए, जीवन नैया पार उतारी।
अक्षर का बस फेर जरा सा, कर्मों का संसार यहाँ,
किसने क्या पाया जीवन में, इसका ही विस्तार यहाँ।
धर्म सिखाता त्याग जगत को, निज सुख का बलिदान करो,
सबका हित हो जग में जिसमें, ऐसा कुछ सत्कर्म करो।
समाज कल्याण की धारा में, अपना सुख भी पाता है,
मानवता के मंदिर में वह, सच्चा दीप जलाता है।
किंतु अधर्म पाप की घाटी, स्वार्थ की यह अंधियारी,
दूसरों की खुशियाँ छीनकर, करता मनमानी न्यारी।
औरत, नर या कोई प्राणी, सबका हक जो खाता है,
स्वयं का कल्याण खोजने, नरक द्वार ले जाता है।
एक तरफ है त्याग समर्पण, अमृत जैसी धारा जी,
दूजी तरफ हवस तृष्णा की, विष की प्याली सारा जी।
सोच समझकर राह चुनो तुम, जीवन अमिट कहानी है,
धर्म करो तो मुक्ति पाओ, अधर्म बहुत ही पानी है।
-सुरेश
2 महीने पहले
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