विज्ञापन

आँखों को पढ़ने का हुनर आना चाहिए जनाब

Suresh Mulchandani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आँखों को पढ़ने का हुनर आना चाहिए जनाब,
        
                                                    
                            
हर इक ख़ामोशी में छिपा होता है नया जवाब।
लफ़्ज़ तो अक्सर हाल-ए-दिल कह नहीं पाते,
कुछ जज़्बात होंठों तक आकर ठहर जाते।
कभी पलकों की हल्की-सी झुकावट पढ़ लेना,
कभी ठहरी हुई नज़र का इशारा समझ लेना।
ज़रूरी तो नहीं हर मुस्कान में ख़ुशी छिपी हो,
और हर ख़ामोशी के पीछे कोई ग़म की नदी हो।
कुछ आँखें हँसते-हँसते भी दर्द छुपा लेती हैं,
कुछ बिन बोले ही पूरी कहानी सुना देती हैं।
चेहरों से आगे, अब निगाहों तक जाना सीखिए,
हर शख़्स को बस लफ़्ज़ों से नहीं—
उसकी आँखों से पहचानना सीखिए।
क्योंकि हर कोई अपने दर्द को
लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं कर पाता…
मगर आँखें कभी झूठ नहीं बोलतीं—
बस इन्हें पढ़ने वाला कोई चाहिए। ❤️ आँखों की ज़ुबान
आँखों को पढ़ने का हुनर आना चाहिए जनाब,
हर इक ख़ामोशी में छिपा होता है नया जवाब।
लफ़्ज़ तो अक्सर हाल-ए-दिल कह नहीं पाते,
कुछ जज़्बात होंठों तक आकर ठहर जाते।
कभी पलकों की हल्की-सी झुकावट पढ़ लेना,
कभी ठहरी हुई नज़र का इशारा समझ लेना।
ज़रूरी तो नहीं हर मुस्कान में ख़ुशी छिपी हो,
और हर ख़ामोशी के पीछे कोई ग़म की नदी हो।
कुछ आँखें हँसते-हँसते भी दर्द छुपा लेती हैं,
कुछ बिन बोले ही पूरी कहानी सुना देती हैं।
चेहरों से आगे, अब निगाहों तक जाना सीखिए,
हर शख़्स को बस लफ़्ज़ों से नहीं—
उसकी आँखों से पहचानना सीखिए।
क्योंकि हर कोई अपने दर्द को
लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं कर पाता…
मगर आँखें कभी झूठ नहीं बोलतीं—
बस इन्हें पढ़ने वाला कोई चाहिए। 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Şhahnawaz Pahat

39 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

Rajesh Kumar Sen Raj

4 कविताएं

View Profile