तिरे ही वास्ते तो जी रहे हम
हलाहल अब विरह का पी रहे हम
बहुत मुश्किल है अपना वस्ल जानम
यूं अपने चाक दामन सी रहे हम
रहेगा इश्क़ भी अपना अधूरा
तुझे ही ख़्याल करके जी रहे हम
-सूरज तिवारी