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मुझे खुद नहीं पता

Suraj Chaubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे खुद नहीं पता
        
                                                    
                            
आजकल मैं क्या करता हूं
आने की प्रक्रिया में आ जाता हूं
चले जाने की प्रक्रिया में
चला जाता हूं ...
काम करने की प्रक्रिया में
कुछ कुछ काम भी करता हूं
वह शतरंज की तरह चाल चलती है
मैं लूडो और सांप सीढ़ी की तरह
बस पासे फेंकता रहता हूं
कभी कभी किस्मत के साथ दे जाने की प्रक्रिया में
पासा जीत जाता हूं
कभी हार जाने की प्रक्रिया में खुद की किस्मत से टीस जाता हूं
मुझे खुद नहीं पता
आजकल मैं क्या करता हूं
ज्योतिषी की तरह कभी तर्क लगाता हूं
कभी थक हार कर बैठ जाता हूं...
कभी कभी मुझे बस ये ही पता होता है कि
मैं खुद के बारे में कुछ कुछ
खोया खोया सा पता पाता हूं...।

~ सूरज चौबे
एक महीने पहले
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