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अमर प्रेम

Sunita Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम मेरे अमर प्रेम हो, मन के सुंदर स्वप्न।
        
                                                    
                            
तुमसे ही जीवन महका, तुमसे जुड़ा मन।
पार्वती-सी तप की शक्ति, शिव-सा अटल विश्वास।
प्रेम जहाँ समर्पण बन जाए, वहीं होता मधुमास।

हरितालिका का पावन पर्व,प्रेम साधना सिखलाए।
अटूट रहे विश्वास सदा,मन में दीप जलाए।
मन की हर अभिलाषा लेकर,करती हूँ आराधन।
सात जन्म तक साथ रहे, ऐसा हो समर्पण।

शिव-पार्वती के प्रेम जैसा, निर्मल हो अनुराग।
सुख में संग और दुःख में संग, हर पल रहे सुहाग।
न रूठे विश्वास कभी, न टूटे प्रेम की डोर।
एक-दूजे के साथ से सुंदर, जीवन का हर छोर।

तुम मेरे अमर प्रेम हो, तुमसे मेरी पहचान।
तुमसे ही सजता जीवन, तुमसे ही मुस्कान।
हरितालिका के इस पर्व पर, बस इतनी अरदास।
जन्म-जन्म तक साथ रहे, प्रेम भरा विश्वास।
-सुनीता तिवारी"सरस"
2 दिन पहले
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