विज्ञापन

अजनबियों के शहर आकर

sumit singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खो गया हूँ मैं अजनबियों के शहर आकर
        
                                                    
                            
एक तस्वीर ने बताया की मैं कैसा था

उसकी तो खुदा कसम नजरे भी जहरीली थी
वो बचपन का साथी बेशक मरहम के जैसा था

फिर वही आशिकी और वही मुलाक़ाते
वो पल भी कैरव के पत्तों के जैसा था

मेरी नादानियां भी मेरे गाँव तक साथ थी
वो रूठना भी क्या कमाल के जैसा था

 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile