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मैं दूर खड़ा होकर

SUBHASH SHYAM SAHARSH

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं दूर खड़ा होकर तमाशा देखता हूँ
        
                                                    
                            
जो छोड़ गए उन्हें अपना सा देखता हूँ
कहने की बात थी हर कोई कह गया
बीते रात में दिन की परछाई देखता हूँ
आप थे आप अच्छे भले क्यों बदले
अब आपसे बदले हर नज़ारे देखता हूँ
ठहरने की बात होती रुक जाते हम तो
बिछड़े थे जहाँ हम वो रास्ता देखता हूँ।
एक महीने पहले
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