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आषाढ़ के बादल बरस गए

SONI RAWAT

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आषाढ़ के बादल फिर आ गए
        
                                                    
                            
कभी दिल, कभी आँखों में छा गए

कभी लाल- काले बादल बन छा गए
कभी सफेद बादलों का समूह बन गए

कभी गरज, कभी बिजली चमका गए
कभी हवाओं के संग सब दूर चले गए

कभी रिमझिम, कभी घने बरस के गए
कभी तूफान, कभी आंधी संग बरस गए

कभी धूप,कभी अंधेरा करके चले गए
कभी बरसे, कभी बिन बरसे चले गए

कभी सूखी ज़मीन को भीगा के चले गए
कभी पहाड़ों में बादल फट के चले गए

कभी ख़ुशी, कभी गम देके चले गए
कभी खुद ही के आंसू बन बरस गए

मानसून की दस्तक देके चले गए
आषाढ़ के बादल अब के बरस गए।
-सोनी रावत
3 महीने पहले
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