विज्ञापन

विभाजन विभीषका स्मृति दिवस

Sima Kedia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            14 अगस्त 1947 की वो काली रात,
        
                                                    
                            
जब भारत के दो टुकड़े कर दिये गए।
भौगोलिक सीमाओं का हुआ विभाजन,
मानवता के चिथड़े चिथड़े हो गए।

खौफनाक,दर्दनाक,वीभत्स रात,
लाशों ही लाश के ढेर लग गए।
घरों को छोड़ पलायन को मजबूर,
शरणार्थी बनकर भटकने लगे।

विभाजन की इस वीभत्स त्रासदी में,
महिलाओं का हुआ अपहरण, उत्पीड़न।
अनेक बच्चों को दे गया बेवजह,
अकेलापन और अनाथालय की शरण।

दोनों देशों के बीच चलने वाली ट्रेनों में,
खून की नदियाँ बहती दिखी।
लाशों को होने लगा आदान-प्रदान,
सिर्फ सिसकियां सुनाई देने लगी।

जिन्ना और नेहरू ने संभाली
भारत पाकिस्तान की बागडोर।
इन्हें तो राजगद्दी का मिला सुख,
जनता तरसने लगी रोटी के कौर।

कैसे भूल जायें बिभाजन विभीषिका को,
जब अपनों को ही छोड़कर आना पड़ा।
अंग्रेजों ने दो भाग कर दिया देश का,
हिंदू मुसलमानों में झगड़ा लगा दिया।
 
4 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1570 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6843 कविताएं

View Profile