विज्ञापन

वक़्त गुज़र जाने के बाद

Shreyasi Satish

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम ही ने तो खो दिया मुझे पाने के बाद,
        
                                                    
                            
मेरी क़ीमत समझ रहे हो मेरे जाने के बाद?

कोई भी राह जीने की मिली ही नहीं तुम्हें,
लौट आए हो क्यों आशियाँ उजड़ने के बाद?

तग़ाफ़ुल करना मेरी सीरत में शामिल नहीं जानाँ,
कोई शिकवा किया न अदावत तेरे जाने के बाद।

बस यही पूछता है मेरा मायूस दिल तुमसे,
क्यों आए हो मौसम-ए-मोहब्बत बीत जाने के बाद?

लौट आए हो पर दरम्याँ दूरियाँ रहेंगी सदा,
ये समझोगे तुम भी वक़्त गुज़र जाने के बाद।
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all