विज्ञापन

विपदा-विनाशक वीर

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब-जब जीवन डोले मन, छाए संकट घोर,तब-तब लेकर नाम तुम्हारा, खुलते भाग्य के द्वार।
        
                                                    
                            
अंजनी के अमर दुलारे, केसरी के मान, दीन-दुखी के तुम रखवाले, मेरे वीर हनुमान l

भक्ति तुम्हारी दीपक जैसी, तम को दूर भगाए, टूटे मन में साहस भरकर, आशा फिर जगाए।
राम-नाम की ध्वजा उठाए, करते जग कल्याण,
संकट हरकर सुख बरसाते, मेरे वीर हनुमान l

गिरते को तुम हाथ पकड़कर, मंज़िल तक पहुँचाते, सूनी आँखों में विश्वास के, दीप नए जलवाते।
पर्वत जैसी पीर पिघलती, मिलता नव सम्मान,
दुख के बादल दूर भगाते, मेरे वीर हनुमान l

शक्ति, सेवा, प्रेम, समर्पण- तुमसे ही पहचान, भक्ति की हर साँस में बसता, पावन तुम्हारा गान।
रोम-रोम में राम बसे हैं, मुख पर राम का ध्यान, जग के हर संकट के पालनहार, मेरे श्री हनुमान l

करुणा की तुम अमृत-गंगा, निर्बल का आधार, तुम बिन सूना हर उत्सव है, तुमसे ही संसार।
चरण-कमल में शीश नवाऊँ, रखना सदा सम्मान,
जीवन-नैया पार लगाना, मेरे दयालु हनुमान l
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1636 कविताएं

View Profile