विज्ञापन

राम आ जाना

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हनुमान , राम को मेरे घर तुम ले आना,सूने मन-मंदिर में दीपक बन जल जाना।
        
                                                    
                            

साँस-साँस में राम बसें, धड़कन राम सुनाए,
मेरे सूने आँगन में फिर प्रेम-फूल खिलाए।
दुख की हर दीवार गिराकर सुख बरसा जाना, हनुमान, राम को मेरे घर तुम ले आना।

थाली में मैं प्रेम सजाऊँ, दीप जलाऊँ द्वारे, आँख बिछाए बैठी हूँ मैं, खोल सभी किवाड़े।मेरी सूनी राहों में तुम आशा बन आना,हनुमान , राम को मेरे घर तुम ले आना।

राम जहाँ हों, शांति वहीं हो, प्रेम वहीं मुस्काए,
राम बिना ये जीवन मेरा हर पल अश्रु बहाए।
मेरे भाग्य की सूखी धरती फिर हरियाना, हनुमान, राम को मेरे घर तुम ले आना।

न धन चाहूँ, न वैभव चाहूँ, न ऊँचा सिंहासन,बस मिल जाए चरण-रज उनकी, यही मेरा धन।भक्ति का अमृत मेरे जीवन में बरसा जाना,
हनुमान, राम को मेरे घर तुम ले आना।

जब तक धड़के प्राण ये मेरे, नाम तुम्हारा गाऊँ, राम मिलें तो जीवन अपना सफल-सफल मैं पाऊँ। मेरी हर अरदास प्रभु तक तुम पहुँचाना, हनुमान, राम को मेरे घर तुम ले आना।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

689 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile