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माँ सिद्धिदात्री

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कमल के आसन पर माँ विराजीं, मुख पर दिव्य प्रकाश है, चार भुजाओं वाली मैया, तेरी महिमा अपरंपार है।
        
                                                    
                            
जय माँ सिद्धिदात्री, जय माँ सिद्धिदात्री, तेरे चरणों में दुनिया सारी। तेरी कृपा से राहें सजतीं, तू ही सबकी पालनहारी।
शंख, चक्र और गदा धारण कर, कमल हाथ में खिलता है, तेरे दर पर शीश झुकाने, हर दुखियारा चलता है।
सिद्धि-बुद्धि का वर देने वाली, तू भक्तों का मान है, तेरी ममता की छाया में, मिलता सच्चा ज्ञान है।
जय माँ सिद्धिदात्री, जय माँ सिद्धिदात्री, तेरे चरणों में दुनिया सारी। तेरी कृपा से राहें सजतीं, तू ही सबकी पालनहारी।
नौ दिन की आराधना पूरी, मन में तेरी आस रहे, तेरे नाम का दीप जले माँ, हृदय में तेरा वास रहे।
अहंकार का अंधकार मिटे, मन में प्रेम जगाना माँ, भटके हुए सभी प्राणों को, सच्ची राह दिखाना माँ।
धन से बढ़कर ज्ञान दे मैया, मन में निर्मल भाव रहे, सुख में भी हम तुझे न भूलें, दुख में तेरा साथ रहे।
जय माँ सिद्धिदात्री, जय माँ सिद्धिदात्री, तेरी महिमा सबसे न्यारी। तेरे आशीष से महके जीवन, हे माँ जग की सुखकारी।
नमन तुझे हे जगत जननी, नमन तेरा दरबार, तेरी कृपा बनी रहे माँ, बस इतना-सा उपहार।
महानवमी के पावन दिन पर, करती हूँ स्वीकार, मेरे मन के हर शब्द में माँ, बस तेरा ही हो गुणगान।
1 सप्ताह पहले
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