विज्ञापन

गाँव की बेटी

Shreya awasthi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिट्टी की खुशबू में पलती,
        
                                                    
                            
आँखों में सपने हजार,
गाँव की नारी बढ़ रही है,
बदल रहा उसका संसार।

चूल्हे तक सीमित अब नहीं,
उसके सपनों की उड़ान,
हुनर के दम पर आज बना रही,
अपनी अलग पहचान।

बेटा-बेटी एक समान हो,
हर घर का यह विचार हो,
बेटियों को भी मौका मिले,
उनके सपनों का संसार हो।

एक महिला जब आगे बढ़ती,
पूरा परिवार संवरता है,
और उसी के साथ-साथ
पूरा गाँव भी आगे बढ़ता है।

मेरी बस इतनी-सी इच्छा,
हर बेटी को सम्मान मिले,
अपने सपनों को जीने का
हर बेटी को अधिकार मिले।
-श्रेया अवस्थी
2 सप्ताह पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Şhahnawaz Pahat

39 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

Rajesh Kumar Sen Raj

4 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

854 कविताएं

View Profile