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एक कलम और बस एक किताब

Shivcharan Dass

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक कलम और बस एक किताब है
        
                                                    
                            
फ़कत इतना सा ही मेरा असबाब हैं

रूह के साथ जुड़ा है मेरा यह बदन
बदन के साथ ये चेहरा भी नकाब है

भूल चुका हूँ अब तो खुद का पता मैं
क्या नाम है और कौन सा ख़िताब है

पाल रखा है हमने जिसे इस दिल में
जानलेवा वही तो मेरा बस अजाब है

प्यासे को पानी और भूखे को खाना
दास हर धरम में देना बड़ा शबाब है
एक महीने पहले
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