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क्यों कोई भी राम नहीं है मेरी राम कहानी में

shivam sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ तो रक्खा होगा ही महबूब की आँख के पानी में
        
                                                    
                            
डूब नहीं जाते तो हम क्या करते भरी जवानी में

पहले वस्ल की दिलकश रातें और फिर हिज्र की सौग़ातें
तुम क्या जानो तुम ने क्या क्या खोया है नादानी में

सागर जैसा ग्राही रहना और नदिया जैसा बहना
वरना अक्सर कीड़े पड़ जाते हैं ठहरे पानी में

आज उम्मीद वफ़ा की करना वो भी ऐसी दुनिया से
बिलकुल वैसा, जैसे कोई पानी लिख दे पानी में

कोई मंथरा कोई कैकेयी कोई रावण है इसमें
क्यों कोई भी राम नहीं है मेरी राम कहानी में

ज़िक़्र तुम्हारा आये जिस में शेर वही हो सकता है
वरना क्या रक्खा ऊला में क्या रक्खा है सानी में
- शिवम् शर्मा गुमनाम
3 महीने पहले
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