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जय बजरंगबली

shivam khare

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जय बजरंगबली जय जय बजरंगबली
        
                                                    
                            
क्षमा करो बजरंगबली
प्रथम नहीं लिया श्री राम का नाम
ना ही कहा श्री सीताराम हे बजरंगबली
लिखा तो यही है बजरंगबली
राम नाम सुनकर सबको
मनवांछित फल दे देते बजरंगबली

बस यही थोड़ी गड़बड़ हो गई
भक्ति सिर्फ़ स्वारथ की हो गई
कारज सिद्ध करने अपने
राम नाम की रिश्वत अब आम हो गई

तुम जो हो भक्ति के अवतार
दीन दुखियों के ओ भरतार
मात्र बल के साथ ही तेरा नाम जुड़कर रह गया
पर तुम तो हो सहज सरल निश्छल सरकार

तेरी भक्ति हेतू इतनी वर्जनाएं
पहुँचने तुझ तक इतनी बाधाएँ
डराते सभी शास्त्र नियम तुझको लेकर
तेरे बारे में क्या क्या ना शंकाएँ

तुझे भगवान जो इनने समझा होता
नाता जो निष्काम जोड़ा होता
इच्छापूर्ति की तू कोई मशीन नहीं ये क्या जाने
मन का जो नहीं किया होता इनका
कदाचित तुम्हें भी इनने ना छोड़ा होता

जय श्री राम कहने वाले इन्हें राम से नहीं कोई वास्ता
राम से ठीक विपरीत है इनका रास्ता
हैं इनके नारों में राम, इनके सब औज़ारों में राम
पर लेषमात्र भी इनकी नहीं राम में आस्था
-शिवम् खरे
2 महीने पहले
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