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ताउम्र खोजते फिरे हम तुम्हें पहचान!

Sheetal Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्र भर डरते रहे तुम्हे खोने से
        
                                                    
                            
भिन्न लिबास , झट रोने से
खामोशी रख सहेजने के 'इज्तिहाद'किए
नित्य जलाए आशा के बुझे दिये
ढूँढा जग सारा
हर नज़र टटोली
बेनाम होकर भी है बदनाम
कभी तो मिल जाती
ताउम्र खोजते फिरे हम तुम्हें पहचान!
1 सप्ताह पहले
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