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कायल जिसकी दुनिया सारी

Shatyagashi -The

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न छुआ,
        
                                                    
                            
न उसने बॉडी टच की,
न उसने ललकारा।
अपने ही सुकर्मों से उसने,
फिरंगियों तक को दुत्कारा।
अहिंसा का पाठ पढ़ा कर
उसने हिंसा को ही मारा।
मातृ-भूमि के गौरव खातिर,
अपना जीवन ही वारा।
कर्मठ बन कर्मठता सिखलाया,
सरल बन सरलता।
स्वच्छभाव से उसने सिखलाया,
हम सबको निर्मलता।
राम नाम में रम कर उसने,
की कल्पना रामराज की।
तोड़ बेड़ियाँ गुलामी की,
की कल्पना स्वतंत्रराज की।
कायल जिसकी दुनिया सारी,
क्यों न गुण को जापू?
कोई नहीं बस एक ही हैं वो,
राष्ट्रपिता हमारे बापू।
- पवन कुमार साव "शत्यागाशी"
3 सप्ताह पहले
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