विज्ञापन

सड़कें हैं वीरान

SHASHI BHUSHAN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सड़कें हैं वीरान,
        
                                                    
                            
शहर बना मैदान,

बना ग्लेशियर काल,
पिघल रहा चट्टान,

कुदरत से खिलवाड़,
आफ़त में है जान,

जल धारा के सामने,
टिका न आलीशान,

त्राहिमाम का शोर,
मौन चीन भूटान,

संकट में दे साथ,
भारत देश महान,

मानवता हो लक्ष्य,
करो नित्य संधान,

'गुंजन' मन में क्षोभ,
प्रभु करना कल्याण,
--शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12479 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile