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जूनून ए मोहब्बत अब भी कम नहीं है

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जूनून ए मोहब्बत अब भी कम नहीं है यारो
        
                                                    
                            
अफसोस कि जिगर में वो दम नहीं है यारो

बहुत मुश्किल है इस दुनिया को समझ पाना
जितना भी समझ पाओ वो कम नहीं है यारो

मेरी बर्बादियों का मत करो अफ़सोस ज्यादा
मुझे तो वक़्त के बदलने का ग़म नहीं है यारो

जिधर भी झांकता हूँ दिखती है वहसतें उधर
अब किसी के जिगर में वो रहम नहीं है यारो

सच है कि ज़िन्दगी की शाम होने को है "मिश्र"
पर जीने की कशिश अब भी कम नहीं है यारो

शांती स्वरुप मिश्र


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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