विज्ञापन

दर्द-ए-दिल बताया मत करिये

Shanti Swaroop

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने आंसुओं को आँखों से, बहाया मत करिये
        
                                                    
                            
अपना दर्द-ए-दिल किसी को, बताया मत करिये
लोगों का क्या वो तो तैयार बैठे हैं नोंचने के वास्ते,
यूं ही किसी को अपने ज़ख्म, दिखाया मत करिये
ये दुनिया बड़ी ही फ़ितरती और खुदगर्ज़ है दोस्तो
यूं किसी को भी अपने दिल में, बिठाया मत करिये
बड़े करीब से देखा है हमने मुखौटों के हुजूम को
कभी यक़ीन किसी के वादों पै, ख़ुदाया मत करिये
बड़े ही शातिर दिमाग हैं लोग इस दुनिया के 'मिश्र'
कहीं भी, अंदर के भेद बाहर, नुमाया मत करिये
-शांती स्वरूप मिश्र
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Kumar

1 कविता

View Profile