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कमरा नहीं है

Shailbala Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर बड़ा और सुंदर है
        
                                                    
                            
भगवान का मंदिर अंदर है
अन्न धन दूध और भरा दही है
पर मां बाप के लिए कमरा नहीं है।

मां बाप ने न होने दी कमी
आंखों में न आने दी नमी
वो पिता जो चिलचिलाती धूप रहा
बारिश और कड़कती ठंड सही है
पर आज उनके लिए कमरा नहीं है।

जो मां रोज आखिर में खाई
बच्चों को हर खुशी दिलाई
हर दुख उसके अचरा में कहीं है
पर आज उनके लिए कमरा नहीं है।
-शैलबाला कुमारी
एक महीने पहले
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