अजीब धोका दिया मुझे
मेरी मसनद (कुर्सी) ने,
ज़माना सर झुकाता रहा
और मैं ख़ुद को मोहतशम
(इज़्ज़तदार) समझती रही।
- शफ़क़ रऊफ