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इश्क़ है क्या? ये बंदगी है क्या?

Satyendra Rubi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरी आँखों में फिर नमी है क्या?
        
                                                    
                            
बात दिल में कोई चुभी है क्या?

बोझ लगने लगी हैं साँसे भी
आह सीने में फिर उठी है क्या?

तुम से मिल कर बरस पड़ीं आँखें
इस से बढ़ कर कोई ख़ुशी है क्या?

जिन से फूलों को रश्क आता है
इस क़दर तुम में सादगी है क्या?

हाल-ए-दिल सब को क्यूँ बताते हैं?
आप की सब से दोस्ती है क्या?

उन से मिल कर ही पूछ लो ‘रूबी’!
इश्क़ है क्या? ये बंदगी है क्या?
2 महीने पहले
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