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वहां घर हमारा है

SATYENDRA KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां पावन गंगा का किनारा है
        
                                                    
                            
जहां सरयू का किनारा है
जहां बगल में बक्सर,आरा है
जहां जय प्रकाश का सिताबदियारा है
जहां "विश्व विजयी बनो" का गूंजता नारा है
जहां " वसुधैव कुटुंबकम्" का गूंजता नारा है
जहां " बनो निडर" का गूंजता नारा है
जहां की माटी में अंगारा है
जहां सुंदरता का नजारा है
जहां उजियारा है
जहां भाईचारा है
वहां घर हमारा है
वह देवस्थान हमारा है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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