मस्त बादल !
व्यस्त बादल!
जरा थम जाओ
जरा सहम जाओ
मुझे घर जाना है
मुझे गांव जाना है
इतनी भी क्या जल्दी है?
कल बरस जाना
इतनी भी क्यों जल्दी है?
मुझे माता पिता से मिलने जाना है
थोड़ा थथम जाओ
थोड़ा रहम खाओ।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'