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जीवन और विराम चिह्न

Satyendra dwivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कल तक तो प्रश्नचिह्न था,
        
                                                    
                            
अब पूर्ण विराम बन गया।
विस्मयादिबोधक सा था,
अब अर्द्ध विराम बन गया।
अल्पविराम का कहना था,
मुझ सा कोई नहीं।
अवतरण ऐसा हुआ कि,
नामों-निशाँ मिट गया।
एक महीने पहले
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