कल तक तो प्रश्नचिह्न था,
अब पूर्ण विराम बन गया।
विस्मयादिबोधक सा था,
अब अर्द्ध विराम बन गया।
अल्पविराम का कहना था,
मुझ सा कोई नहीं।
अवतरण ऐसा हुआ कि,
नामों-निशाँ मिट गया।