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निःशब्द

satyanarayan gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            निःशब्द मैं
        
                                                    
                            
निःशब्द तुम
शब्द निकले भी तो क्या
वर्षों का पिटारा
अचानक कैसे खुले
वह भी
औरों के बीच
छिछोरों के बीच
हाँ
तुम्हारी आँखों में
मैंने
बहुत कुछ पढा
शायद
तुमने भी
देखा होगा
बहुत कुछ
मेरी आँखों में
2 महीने पहले
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