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स्वयं जलकर जग को रोशन करता

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूर्य का जीवन देखो कितना कष्ट भरा होता है,
        
                                                    
                            
पर उसकी इस तपस्या में ही सारा संसार जीता है।
वो रोज सुबह चुपचाप गगन में आता है,
अपने ही भीतर एक दहकता अंगार जगाता है।

खुद जलता है, खुद तपता है, पल-पल कष्ट उठाता है,
पर चेहरे पर सदा एक पावन मुस्कान सजाता है।
वो नहीं शिकायत करता अपनी इस जलन की कभी,
उसी की धूप से महकती है ये सुंदर धरती सभी।

बिना किसी भेदभाव के वो अपनी किरणें बरसाता है,
अमीर हो या गरीब, वो सबको गले लगाता है।
उसकी निस्वार्थ भावना से ही चलती ये दुनिया सारी,
सच्चा जीवन वही है, जिसमें हो परोपकार की तैयारी।

हर अंधियारे को मिटाकर, वो नया सवेरा लाता है,
त्याग और परोपकार का सच्चा पाठ पढ़ाता है।
कष्ट सहकर भी जो दूसरों का जीवन सँवार दे,
वही तो इस सृष्टि का असली पालनहार कहलाता है।

-: सार्थक पियुष सिंह
2 महीने पहले
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