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एक ग़ज़ल

Santosh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम से ज्यादा तो मुझे कोई पियारा न रहा ।
        
                                                    
                            
तेरे चेहरे के सिवा कोई नजारा न रहा ।

साथ तुम मेरा निभाने से हमेशा भागे,
तुम मेरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा ।

जिन्दगी मेरी हमेशा ही अकेले बीती,
हम किसी के न हुए कोई हमारा न रहा ।

मैंने जीवन में कभी प्यार किसी से न किया,
इस वजह से मैं किसी का भी दुलारा न रहा ।

अपने ही दम पे मैं जीवन में बढ़ा आगे सदा,
मेरे जीवन में कभी कोई सहारा न रहा ।

मैं सदा अपने उसूलों पे ही कायम रहता,
उनसे ' संतोष ' कभी हटना गवारा न रहा ।
- संतोष बौद्ध
 
3 सप्ताह पहले
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