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कविता नशा

Sankhajit Bhattacharjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो नशा करता है,
        
                                                    
                            
उसके लिए मैं क्यों सोचूँ?

वह खुद की भलाई के लिए नहीं सोच रहा है।
वह खुद को खतरे में डाल रहा है।
वह खुद का विनाश कर रहा है।
अगर वह अपने बारे में सोचता
तो वह कभी खुद को ऐसे मार नहीं सकता।

जब तक न वह खुद समझे,
तब तक मैं कैसे उसे समझाऊंगा?

नशे की चीजें अगर नहीं मिलेंगी
तो वह खुद को मारने से पहले
सभी को मार डालेगा!
2 महीने पहले
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