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पिया गए हमरो परदेसी

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पता नहीं कब आवेंगे वह,
        
                                                    
                            
पिया गए हमरो परदेस।
अब तो मुन्ने को भी आस,
जब पिता लौट आवेंगे देश।।

पिया दूर, पर जीवन धन तो,
पास मेरे, मन क्यों मुरझाए।
रहें सलामत पुत्र-पति दोऊ
बार-बार दिल को समझाएं।।
––संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
1 सप्ताह पहले
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