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पॉकेट क्यों मेरा कुतर दिए?

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बैग हमारे तुमने कुतरे,
        
                                                    
                            
चप्पल जूते भी कुतर दिये।
क्या दुश्मनी मुझसे तेरी,
पॉकेट क्यों मेरा कुतर दिए?

कैसे जाऊं मैं स्कूल,
कॉपी-किताब गिर जाएंगे।
पॉकेट जूते फटे देखकर,
सर तो मुझसे चिढ़ जाएंगे ।।

क्यों रात को गड़बड़ करते ?
खड़बड़-खड़बड़ इधर-उधर।
पूरा घर रद्दी भर देते,
छुप जाते ना पता किधर ।।

खुरखुर करते पूरी रात,
सोना कर देते दुश्वार ।
जी तो करता हड्डी तोड़ूं ,
पटक के मारूं इतनी मार।।

डब्बे कुतरे, कागज कुतरे
कुतर दिए तुमने अनाज ।
टूटी तस्वीर देख पापा तो,
गुस्से होंगे कितने आज ।।

मान जाओ ऐ चूहे राजा !
अब ना करो शरारत ।
मम्मी आग बबूला हाेंगी,
देख तुम्हारी यह आदत।।
4 सप्ताह पहले
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